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Shaheed - E - Aazam Movie Story

ये देश आजाद हुआ था 1947 में, और सरदार भगत सिंह जी की शहादत हो गयी थी 1931 में , बीच का समयांतरालरहा 16 साल का तो क्या उनकी शहादत के बाद हिंदुस्तान में अंग्रेजो के खिलाफ क्रांति नही हुई....? अगर हुई तो किसने की....? शहीद ए आज़म को फाँसी हुई किसकी गवाही पर हुई ...? उस गद्दार का क्या हश्र हुआ ....? उस हश्र को अंजाम किस ने दिया.....? आज तक सभी फ़िल्म मेकर शहीद ए आज़म के जन्म से फ़िल्म शुरू करते आये है और उनकी शहादत के बाद फ़िल्म खत्म....😊।लेकिन शहीद ए आज़म उनके जन्म के एक साल पहले से शुरू होती है और शहादत के 16 साल बाद तक की कहानी बताती है। देश की आज़ादी के बाद क्यों सरदार भगत सिंह जी के प्रमुख मित्र और उनके प्रमुख क्रांतिकारी रणनीति का रकोगुमनाम रखा गया इस पर से पर्दा उठती है शहीद ए आज़म (एक अनकही कहानी)। यह एक ऐसी फिल्म है जैसी नकिसी ने देखी होगी न इसकी कल्पना तक की हो गी। 4 साल के रिसर्च के बाद आपके सामने होगी आप के नज़दीकी सिनेमा घरों में 15 अगस्त 2017 को। नोट: फ़िल्म में हरदर्शक वर्ग का ध्यान रखा गयाहै।यह फ़िल्म, फ़िल्म नही हकीकत है। याद रखेगी दुनिया इस चंपारण को....

याद रखेगी दुनिया इसचंपारण को.... My film will prove who was the real hero in real meanings for in the fight of freedom..... 1907-1947. a little hints.... Lt. Kamal Nath Tiwari was born at Sarya-Pipara, E.Champran (not in Bagaha, bankatwa etc... w.champaran) Bihar on 28 march 1907. his father's name was Lt. pd. Suryanath Tiwari & mother was Lt. smt.Bhagwanti Devi. When he was a high school boy at Raj high school Bettiah, on 28 may 1923 was expelled from school for his revolutionary activities. Later he went to Calcutta with Fanindra Nath Ghosh and Manmohan Mukharjee and came into contact with Bhagat Singh and others. He helped Bhagat Singh and his comrades by providing chemicals to make bombs for their revolutionary works. Once, when Fanindra Nath Ghosh became an approver and identified Tiwari ji as a revolutionary, police arrested him on 28 May, 1929 at Bettiah and post him to lahore jail. In Lahore, he participated on hunger strike with his co prisoners and later he was sentenced to life imprisonment and sent to Celluler Jail, Andaman (1929-1947)....

Note: The real reason of Gandhi's Champaran Yatra in April 1917, Other Details and rest story in Film😊... आज पहली बार इस websit केमाध्यमेमैं आधिकारिक तौर पर घोषणा करता हूंकि जो भी कलाकार या टेक्निशियन या कोई भी व्यक्ति जो फिल्म सेजुड़े किसी भी कार्य को निशुल्क कर रहे हैं, फिल्म की लागत वापस होन ेके बाद आयकी 50% राशि उन के बीच उन केकार्य केहिसाब से बराबर बराबर बाँट दियाजाएगा। और आय की बाकी बची 50% शेष राशि केंदर व राज्य सरकारो ंको अनाथालयों और वृद्धाश्रमों मं बांटने के लिए दान करदी जाएगी। चाहे वो कमाई की राशि एक लाख हो या एक हजार करोड। इस घोषणा का कोर्ट से एफिडेविट करा के भारत की सरकार और बिहार की सरकार को दे दिया है। उस की छाया प्रति जल्द ही मैं इसी पोस्ट पर भी डालूंगा जय हिंद, जय भारत, जय मातृभूमि।